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घर की दिशा, डिजाइन और सजावट वास्तु शास्त्र के अनुसार न हो तो ये हमारी खुशियों और सफलता में रुकावट भी बन सकती है। अगर ऐसा हो रहा है तो नीचे दिए गए वास्तु के आसान उपाय जरूर आजमाएं।
वास्तु शास्त्र में घर के लिए वास्तु दिशा, डिजाइन और सजावट बहुत मायने रखती है। आइए जानते हैं कि आपको अपने घर में वास्तु की जरूरत क्यों है।
वास्तु के नियम घर में पॉजिटिव ऊर्जा बनाए रखने में मदद करते हैं। जब घर में नकारात्मकता या तनाव नहीं होता तो आप खुद को ज्यादा शांत, खुश और आराम महसूस करते हैं।
घर में कुछ छिपे हुए वास्तु दोष आपके स्वास्थ्य को खराब कर सकते हैं या हमेशा थकान महसूस करा सकते हैं। लेकिन अच्छी बात यह है कि वास्तु शास्त्र की मदद से इन परेशानियों को दूर किया जा सकता है और आप बेहतर सेहत का अनुभव कर सकते हैं।
घर के लिए सही वास्तु टिप्स का उपयोग करके आप 'धन क्षेत्र' को एक्टिव कर सकते हैं। ऐसा माना जाता है कि यह करियर और वित्तीय प्रवाह में नए अवसरों को आकर्षित करता है।
वास्तु में रोमांस की दिशा दक्षिण-पश्चिम मानी जाती है। अगर यह दिशा ठीक रहती है तो रिश्तों में झगड़े कम होते हैं और एक-दूसरे के प्रति प्यार और लगाव बढ़ता है।
घर के लिए वास्तु शास्त्र को समझने से पहले आपको इसकी मूल बातों को समझना होगा: घर की दिशाओं का वास्तु। वास्तु के अनुसार आठ दिशाएं होती हैं (चार मुख्य और चार उप-दिशाएँ), जिनमें से प्रत्येक की अपनी ऊर्जा और एक संरक्षक देवता होता है जिसे दिक्पाल कहा जाता है। आइए एक-एक करके वास्तु के अनुसार घर का नक्शा जानते हैं।
दिक्पाल (संबद्ध देवता): इंद्र, वर्षा के देवता:
पूर्व दिशा नई शुरुआत, अच्छा स्वास्थ्य का प्रतीक है और आपको दूसरों के साथ अच्छे से जुड़ने में मदद करती है। वास्तु विशेषज्ञों का दावा है कि घर का मुख्य द्वार, लिविंग रूम और अध्ययन क्षेत्र यहाँ बनवाने से घर में नई ऊर्जा आ सकती है और विकास को बढ़ावा मिल सकता है ठीक वैसे ही जैसे उगते सूरज से मिलता है।
दिक्पाल (संबंधित देवता): वरुण, जल के देवता
पश्चिम दिशा सभी प्रकार के लाभ, समृद्धि में वृद्धि और आपके जीवन में तरक्की का प्रतीक मानी जाती है। वास्तु के अनुसार, पश्चिम दिशा भोजन कक्ष और बच्चों के कमरे के लिए बहुत अच्छी मानी जाती है।
दिक्पाल (संबंधित देवता): यम, मृत्यु के देवता
घर का यह कोना आपको पहचान दिलाने में मदद करता है। भगवान यम से जुड़ाव के कारण कई लोग इस दिशा से डरते हैं। लेकिन वास्तु के अनुसार, यह दिशा बेडरूम के लिए सही मानी जाती है, खासकर जब आप इस दिशा में मुंह करके सोते हैं।
दिक्पाल (संबंधित देवता): कुबेर, धन के देवता
यह दिशा धन, करियर और नए अवसरों से जुड़ा है। यह स्थान जितना साफ-सुथरा और व्यवस्थित होगा घर में उतना ही अधिक धन प्रवेश करेगा। घर के मुख्य प्रवेश द्वार और नकदी, कीमती सामान या तिजोरी जैसी मूल्यवान वस्तुओं को रखने के लिए उत्तर दिशा सबसे अच्छी वास्तु दिशा है।
दिक्पाल (संबंधित देवता): निरति/ नैरुत्य
दक्षिण-पश्चिम दिशा का घर वास्तु मजबूती, ग्राउंडिंग और रिश्तों के आसपास घूमता है। यह स्थान मोटी दीवारों वाले बेडरूम के लिए सबसे अच्छी जगह है। हालांकि, यहाँ कुएँ या ओवरहेड टैंक जैसी पानी की चीजें रखने से बचना चाहिए।
दिक्पाल (संबंधित देवता): अग्नि, अग्नि के देवता
वास्तु के हिसाब से घर के लिए यह शक्तिशाली दिशा मानी जाती है जो ऊर्जा, अच्छे स्वास्थ्य और धन से जुड़ा है। इस स्थान पर रसोई बनाई जा सकती है और बिजली के उपकरण रखे जा सकते हैं। हालांकि, यहाँ पानी वाली चीजें रखने से बचें क्योंकि अग्नि तत्व जल तत्व के साथ असंगत है।
दिक्पाल (संबद्ध देवता): वायु, पवन के देवता
वायु तत्व द्वारा शासित घर के लिए यह वास्तु दिशा गति, बदलाव और बोलचाल की कला से जुड़ा है। इस दिशा में भंडारण वस्तुओं को रखना, पार्किंग स्थान बनाना या अतिथि शयन कक्ष बनाना अच्छा माना जाता है।
दिक्पाल (संबद्ध देवता): ईशान, भगवान शिव
उत्तर-पूर्व, घर के लिए सबसे शुभ वास्तु दिशाओं में से एक है जिसे घर का मस्तिष्क कहा जाता है क्योंकि यह ज्ञान, बुद्धि और स्वास्थ्य को काबू करता है। इसलिए अपने पूजा कक्ष, पानी की वस्तुएं या बालकनी को उत्तर-पूर्व दिशा में रखना चाहिए।
एक बार जब आप दिशाओं के लिए वास्तु को समझ लेते हैं तो आपके लिए स्वास्थ्य, धन और शांति को आकर्षित करना बहुत आसान हो जाता है। नीचे हिन्दी में घर के लिए वास्तु शास्त्र (Vastu shastra for home in hindi) उपाए दिए गए हैं जिनका उपयोग करके आप बड़ा बदलाव ला सकते हैं।
वास्तु के अनुसार घर का नक्शा नए घर के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि मुख्य द्वार सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है क्योंकि सारी ऊर्जा इसी के माध्यम से प्रवेश करती है और इसी से निकलती है।
लिविंग एरिया वह जगह है जहाँ आप परिवार के साथ अच्छा समय बिताते हैं और मेहमानों का स्वागत करते हैं।
घर के लिए वास्तु दिशा (Vastu direction for home) के अनुसार, शास्त्र में रसोई घर अग्नि तत्व को दर्शाता है और घर के स्वास्थ्य और धन के लिए जिम्मेदार होता है।
घर का वास्तु शास्त्र हिंदी में (Ghar ka vastu shastra in hindi) बताता है कि बेडरूम वह जगह है जहाँ आप एक लंबे दिन के बाद आराम करते हैं। यह तय करता है कि हम कितने आराम से रहेंगे या हमारी नींद कितनी अच्छी होगी।
पूजा कक्ष प्रार्थना और ध्यान के लिए एक पवित्र स्थान है जो घर में सकारात्मक ऊर्जा और शांति लाता है।
घर के लिए वास्तु शास्त्र हिन्दी में (Vastu shastra for home in hindi) बताता है कि बाथरूम और शौचालय एक ऐसे स्थान होते हैं जहां सबसे ज्यादा नकारात्मक ऊर्जा रहती है जो धीरे-धीरे पूरे घर में फैल जाती है।
घर के लिए वास्तु शास्त्र के हिसाब से 10 सुझावों पर नज़र डालें जो वास्तव में आपके घर में शांति, स्वास्थ्य और धन लाने में मदद करते हैं।
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